Purnima in June 2025 | Jyeshtha Purnima

Purnima in june 2025

हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा व्रत का विशेष धार्मिक महत्व होता है। स्कन्दपुराण, नारदपुराण, पद्मपुराण, महाभारत, भविष्यपुराण आदि धार्मिक ग्रंथों में पूर्णिमा व्रत का उल्लेख मिलता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु, माँ लक्ष्मी, और सत्यनारायण की पूजा की जाती है। यह दिन व्रत, दान, और स्नान के लिए अत्यंत पुण्य दायक माना जाता है। पूर्णिमा व्रत पुण्य वृद्धि, पाप का नाश और मानसिक शुद्धि के लिए विशेष रूप से कारगर होता है। आइए जानते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा की पूजन विधि, व्रत की महत्ता और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से।

Jyeshtha Sukla Purnima Date

 Wednesday, 11 June, 2025
Moonrise – 07:41 PM
 

 

Start: (11:35 AM, Tuesday) 10 June, 2025

End: (01:13 PM, Wednesday) 11 June, 2025

Jyeshtha Sukla Purnima Vrat/Upavasa

 Tuesday, 10 June, 2025
Moonrise – 06:45 PM
 

 

Start: (11:35 AM, Tuesday) 10 June, 2025

End: (01:13 PM, Wednesday) 11 June, 2025

ज्येष्ठ पूर्णिमा क्या है?

ज्येष्ठ पूर्णिमा हिंदू कैलेंडर के तीसरे महीने ‘ज्येष्ठ’ की आखिरी तिथि (जून) को पड़ती है। यह दिन पूर्ण चंद्रमा के कारण खास माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, व्रत, दान और पूजा का विशेष महत्व है। दक्षिण भारत में ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि पर वट सावित्री व्रत भी मनाया जाता है, वही उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत रखा जाता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा की पूजन विधि

    • यदि संभव हो तो सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदियों में स्नान करे अन्यथा घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। फिर व्रत और पूजन का संकल्प करते हुए अपने परिवार की कुशलता, सुख, समृद्धि, शांति आदि की कमाना करे।

    • संकल्प पूरा हो इसके लिए कलश स्थापित कर भगवान गणेश की पूजा करे।

    • इसके पश्चात भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा अर्चना करे।

    • इसकाए अतिरिक्त इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है।

    • इस दिन व्रत रखने की परंपरा है। जल, फल और सात्विक भोजन लेकर दिनभर व्रत का पालन करें।

    • घर में साफ स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, तुलसी, चंदन, और प्रसाद अर्पित करें।

    • संयम काल चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित कर पूजन करे।

    • शाम के समय सत्यनारायण व्रत कथा का आयोजन करें। परिवार और पड़ोसियों को बुलाकर सामूहिक रूप से कथा करें।

    • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, पंखा, जल आदि का दान करें।

क्या पूर्णिमा व्रत में आहार का सेवन कर सकते?

ज्येष्ठ पूर्णिमा उपवास में जल, फल तथा सात्विक पदार्थ का सेवन किया जा सकता है। अपनी श्रद्धा क्षमता के आधार पर कुछ लोग केवल जल पर तो कुछ लोग निर्जल व्रत भी रखते है। इस व्रत में अनाज, तंबाकू, चाय, काफी, आदि भोजन वर्जित है।

पूर्णिमा व्रत का पारण

पूर्णिमा व्रत का पारण सायं काल में चंद्रमा को अर्घ्य दे कर किया जाता है। पारण पूर्ण हेतु ब्राह्मण को अन्य, घी, वस्त्र, आदि का दान कर भोजन करना चाहिए। तदोपरांत फलाहार आदि ग्रहण कर व्रत को सम्पन्न करना चाहिए।

पूर्णिमा व्रत का महत्व

ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है। यह व्रत पापों का नाश करता है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है। विशेषकर जो लोग गंगा स्नान करते हैं, उन्हें असीम पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दूध-दही का दान करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है और आर्थिक लाभ होता है।

धार्मिक मान्यताएँ और परंपराएँ

    • इस दिन कई स्थानों पर वट सावित्री व्रत मनाया जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

    • इस दिन गंगा दशहरा का भी विशेष महत्व होता है यदि यह तिथि उससे मेल खाए।

    • पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने राजा हरिश्चंद्र की परीक्षा ली थी।

क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

    • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें

    • व्रत और पूजा विधिपूर्वक करें

    • दान अवश्य करें

    • सत्यनारायण कथा का आयोजन करें

क्या न करें:

    • मांस-मदिरा का सेवन न करें

    • झूठ, कलह और अपशब्दों से बचें

    • व्रत के दिन तामसिक भोजन न करें

Q1. ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 2025 में कब है?

उत्तर: ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 2025 में 11 जून, बुधवार को है।

Q2. जून में पूर्णिमा की तारीख कब है?

उत्तर: जून में पूर्णिमा मुहूर्त 10 जून मंगलवार 11:35 AM से 11 जून बुधवार को 1:13 PM तक है।

Q3. ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन कौन से देवता की पूजा की जाती है?

उत्तर: मुख्य रूप से भगवान विष्णु और सत्यनारायण की पूजा की जाती है। साथ ही गंगा स्नान और वटवृक्ष पूजा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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